बेरी बेरी रोग विटामिन B1 की कमी से होता है ।
इस विटामिन को एन्तिन्युरेतिक फैक्टर भी कहते है ।
बेरी -बेरी का रोग उन क्षेत्रों में अधिक होता है जहाँ पर पालिश किया हुआ चावल खाया जाता है ।
दालें , हरी पत्तीदार सब्जियां ,मुगफली आदि इसके प्रमुख स्रोत है ।
यकृत ,वृक्क ,दूध तथा अंडे की जर्दी में यह विटामिन पाया जाता है ।
चोकरयुक्त आटे की रोटी और दलिया इसके सर्वोत्तम स्रोत है ।
पेलाग्रा नामक रोग विटामिन B7 की कमी से होता है ।
इस विटामिन को नाइसिन या निकोटिनिक अम्ल कहते है ।
पेलाग्रा सामान्यतः उन क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है जहाँ मक्का प्रमुख आहार है ।
मक्का शरीर में नाइसिन के अवशोषण में बाधक है , जिसके कारण यह रोग होता है ।
पेलाग्रा के प्रमुख लक्षण है - त्वचा में जलन ,छाजन ,स्मृति विकार , अतिसार आदि ।
इस रोग को 4D सिंड्रोम भी कहते है ।
मटर , अन्न की भूसी ,सेम ,हरी पत्तेदार सब्जियाँ , कॉफी , यकृत , मछली ,दूध आदि विटामिन B7 के प्रमुख स्रोत है ।
Monday, April 20, 2009
Thursday, April 16, 2009
सम्राट अशोक ...
अशोक ने अपने राज्याभिषेक के नवें वर्ष में कलिंग पर विजय प्राप्त की ।
उसने खस , नेपाल को जीता तथा तक्षशिला के विद्रोह को शांत किया ।
बिन्दुसार की मृत्यु के बाद वह मौर्य वंश का राजा हुआ ।
कलिंग को जितने के बाद तोशली को कलिंग की राजधानी बनायी गई ।
कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने धम्म विजय की निति को अपनाया ।
यह उसका पहला और आखिरी युद्ध था ।
उतर पश्चिम में शाह्बाज्गाधि और मानसेरा में अशोक के शिलालेख पाये गए है ।
काबुल के लम्गान में भी अशोक के लेख अरामाइक लिपि में मिलते है ।
उतर पश्चिम में अशोक के साम्राज्य की सीमा हिन्दुकुश थी ।
काल्शी , रुमिन्देई और निगाली सागर अभिलेखों से पता चलता है की देहरादून और नेपाल की तराई के क्षेत्र अशोक के राज्य में थे ।
उसने खस , नेपाल को जीता तथा तक्षशिला के विद्रोह को शांत किया ।
बिन्दुसार की मृत्यु के बाद वह मौर्य वंश का राजा हुआ ।
कलिंग को जितने के बाद तोशली को कलिंग की राजधानी बनायी गई ।
कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने धम्म विजय की निति को अपनाया ।
यह उसका पहला और आखिरी युद्ध था ।
उतर पश्चिम में शाह्बाज्गाधि और मानसेरा में अशोक के शिलालेख पाये गए है ।
काबुल के लम्गान में भी अशोक के लेख अरामाइक लिपि में मिलते है ।
उतर पश्चिम में अशोक के साम्राज्य की सीमा हिन्दुकुश थी ।
काल्शी , रुमिन्देई और निगाली सागर अभिलेखों से पता चलता है की देहरादून और नेपाल की तराई के क्षेत्र अशोक के राज्य में थे ।
Saturday, April 11, 2009
विष्णु प्रभाकर हमेशा याद आते रहेगे ...
आज विष्णु प्रभाकर हमारे बीच से चले गए लेकिन उनकी रचनाएं हमेशा लोगों के साथ रहेंगी। प्रभाकर को पद्मभूषण दिया गया था, लेकिन देर से दिए जाने के कारण अपने आत्म सम्मान पर चोट मानते हुए लेने से इनकार कर दिया था । उन्होंने अपने स्वाभिमान से कभी भी समझौता नही किया । उनका साहित्य पुरस्कारों से नही बल्कि पाठको के स्नेह से प्रसिद्ध हुआ ।
उनका जन्म 20 जुलाई 1912 को उत्तरप्रदेश में मुजफ्फरनगर जिले के मीरापुर गांव में हुआ था। छोटी उम्र में ही वह पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से हिसार चले गए थे। प्रभाकर पर महात्मा गांधी के दर्शन और सिद्धांतों का गहरा असर पड़ा। स्वतंत्रता संग्राम के महासमर में उन्होंने अपनी लेखनी को अंग्रेजों के ख़िलाफ़ हथियार के रूप में प्रयोग किया।
१९३१ में हिन्दी मिलाप में उनकी पहली कहानी छपी और इसी से उनका साहित्य जगत में आगाज हुआ । आजादी के बाद उन्हें दिल्ली आकाशवाणी में नाट्य निर्देशक बनाया गया। शरतचंद की जीवनी परआधारित आवारा मसीहा उनकी प्रसिद्ध रचना है । उनको साहित्य सेवा के लिए पद्म भूषण, अर्द्धनारीश्वर के लिए साहित्य अकादमी सम्मान और मूर्तिदेवी सम्मान सहित देश विदेश के कई पुरस्कारों से नवाजा गया।
उनका जन्म 20 जुलाई 1912 को उत्तरप्रदेश में मुजफ्फरनगर जिले के मीरापुर गांव में हुआ था। छोटी उम्र में ही वह पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से हिसार चले गए थे। प्रभाकर पर महात्मा गांधी के दर्शन और सिद्धांतों का गहरा असर पड़ा। स्वतंत्रता संग्राम के महासमर में उन्होंने अपनी लेखनी को अंग्रेजों के ख़िलाफ़ हथियार के रूप में प्रयोग किया।
१९३१ में हिन्दी मिलाप में उनकी पहली कहानी छपी और इसी से उनका साहित्य जगत में आगाज हुआ । आजादी के बाद उन्हें दिल्ली आकाशवाणी में नाट्य निर्देशक बनाया गया। शरतचंद की जीवनी परआधारित आवारा मसीहा उनकी प्रसिद्ध रचना है । उनको साहित्य सेवा के लिए पद्म भूषण, अर्द्धनारीश्वर के लिए साहित्य अकादमी सम्मान और मूर्तिदेवी सम्मान सहित देश विदेश के कई पुरस्कारों से नवाजा गया।
Friday, April 10, 2009
सादगी ....
सादगी केवल एक शब्द ही नही , जीवन दर्शन है । सच्चाई का दूसरा नाम । सुन्दरता का प्रतिक ।
इस जमाने में भी कभी कभी दिख जाती है । पर गुमशुम ही रहती है ।
क्या करे ? मजाक नही बनना चाहती ।
सभी की जिंदगी में बुरा समय आता है । आशा रखो ... अंततः जीत सच्चाई की ही होगी । देर भले हो जाय ।
इस जमाने में भी कभी कभी दिख जाती है । पर गुमशुम ही रहती है ।
क्या करे ? मजाक नही बनना चाहती ।
सभी की जिंदगी में बुरा समय आता है । आशा रखो ... अंततः जीत सच्चाई की ही होगी । देर भले हो जाय ।
Wednesday, April 8, 2009
सच कहूँ ... घोर कलयुग आ गया है
वो गंगा । अब नही दिखती । जिसकी आवाज में मधुरता थी । चेहरा देखने के लिए आईने की जरुरत नही थी । जो हमारी प्यास भी बुझाती थी । आज गंदे नाले में बदल गई । उसका कोई दोष नही । वो तो अपने हालत पर रो रही है । उस दिन को याद कर रही है, जब भगीरथ ने धरती पर अवतरित किया । याचना कर रही है ...अब भी छोड़ दो । उसकी आवाज सुनने वाला कोई नही । सच कहूँ ... घोर कलयुग आ गया है ।
Tuesday, April 7, 2009
खुशी .....
कुछ नया करो , जिसमे खुशी मिले । काम बहुत छोटा ही क्यों न हो । इश्वर है न , वह निर्णय लेगा । तो फ़िर लोगो की बातों पर क्यों जाते हो ?वो तुम्हे खुशी नही दे सकते ।
Sunday, April 5, 2009
लज्जा और हया
लज्जा और हया शब्द तो म्यूजियम में रखने योग्य हो गए है । लोगो को दिखाया जायेगा ... ये कभी भारत के अनमोल धरोहर होते थे । लोग विश्वास नही करेगे और बहस शुरू हो जायेगी ।
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