Sunday, November 22, 2009

समुद्रगुप्त ..

समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है । वह अपनी जिंदगी में कभी भी पराजित नही हुआ । उसका विजय अभियान भारत के हर क्षेत्र में कामयाब रहा । प्रथम आर्यावर्त के युद्ध में उसने तीन राजाओं को हराकर अपने विजय अभियान की शुरुआत की । इसके बाद दक्षिणापथ के युद्ध में दक्षिण के बारह राजाओं को पराजित कर उन्हें अभयदान दिया । यह उसकी दूरदर्शी निति का ही परिणाम था ,वह दक्षिण के भौगोलिक परिस्थितियों को भलीभांति समझता था । आर्यावर्त के द्वितीय युद्ध में उसने नौ राजाओं को हरा कर उन्हें अपने साम्राज्य में मिला लिया । बाद में उसने सीमावर्ती राजाओं और कई विदेशी शक्तियों को भी पराजित कर अपनी शक्ति का लोहा मानने पर मज़बूर कर दिया।

समुद्रगुप्त ही गुप्त वंश का वास्तविक निर्माता था । उसका प्रधान सचिव हरिसेन ने प्रयाग प्रशस्ति की रचना की जिसमे समुद्रगुप्त के विजयों के बारें में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है । समुद्रगुप्त ने अश्वमेघ यज्ञ भी करवाया । वह वीणा बजाने में भी कुशल था । उसके दरबार में बुधघोष जैसे विद्वान् आश्रय पाते थे ।

4 comments:

neha said...

lekhan kaafi acchha hai.....kahin na kahin jankaari poori nahi mili aisa laga....waise ek mitra ke naate ye sujhaav hai....ki agar kisi vishya par likh rahen hon to thoda vistaar se janne ke liye net par serch kar lena bhi faydemand rahta hai............kisi bhi haal men aapki bhavnaon ko thhes pahunchane ka koi irada nahi hai.....bura laga ho to maaf karna..dost ke naate kah diya..........

Babli said...

बहुत बढ़िया लिखा है आपने! इस ज्ञानवर्धक जानकारी देने के लिए धन्यवाद!

दिगम्बर नासवा said...

bharat ki itihaas ki sundar jaankaari ..... swarnim kaal kahlaata tha bharat us vaqt ...

mark rai said...

ji aap sabka bahut bahut shukriya....mai jaanbujhkar jyada nahi likha samudragupt ke baare me fir kabhi time hoga to aapki achche tarike se sewa ki jayegi...