Thursday, September 3, 2009

जीवन का अर्थ ......

धन ही सबकुछ नही ....जीवन में और भी बहुत कुछ है कमाने के लिए ....धन तो एक अदना सा हिस्सा है । धन कुछ हो सकता है ,पर सबकुछ तो कभी भी नही । केवल पैसा ही जीवन को खुशियों से नही भर सकता ..खुशियाँ कमाने के और भी बहुत सारे रास्ते है । धन आनंद का स्रोत नही ...अगर ऐसा होता तो हर धनवान के घर लक्ष्मी के साथ साथ सरस्वती भी निवास करती और उसके जीवन में कोई समस्या भी नही होती ।
इतिहास उनको याद करता है ,जो दूसरो के लिए कुछ करते हुए मर गए ....उन्ही की स्मृति दिमाग में कौतुहल पैदा करती है ,न की उनकी जिन्होंने अपना जीवन पैसे कमाने में और दूसरो को चूसने में लगा दिया । आज पैसे का बोलबाला है ..सही भी है , पर एक हद तक ....मूर्खों की तरह केवल पैसे लूटने के चक्कर में हम जीवन का मूल उद्देश्य भूल जाते है ....जीवन के अंत में कुछ हासिल नही कर पाते ।
कुछ लोग जन्म लेते है ..रूपया कमाते है और परलोक की यात्रा पर निकल जाते है ..ऐसे लोगों को इतिहास याद नही करता .....इतिहास ऐसे लोगों को याद करता है जिन्होंने इस जगत को कुछ दिया हो । हम उन महानुभावों को याद करते है ,जिन्होंने स्वार्थ की उपासना नही की .............. ।

4 comments:

RAJNISH PARIHAR said...

ji....paisa bahut kuchh hai lekin sab kuchh nahin....

Deepali said...

Umra ke ek padaav par aa kar aap ye nahi dekhte ki aapne kya kamaya balki ye dekhte hain ki kiska saath paaya...i completely agree with u Mark...

Babli said...

आपने बहुत बढ़िया लिखा है! पैसा तो ज़िन्दगी में बहुत ज़रूरी चीज़ होती है पर आखिर पैसा सब कुछ नहीं होता! कुछ लोग इस बात को नहीं समझते और उनका मानना ये है की पैसे से सब कुछ ख़रीदा जा सकता है !
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

sandhyagupta said...

Aapki baat se sahmat hoon.