Friday, June 5, 2009

..हाय रे मेमोरी !

जब स्कूल में था, तो ये दुनिया बड़ी अजीब लगती थी . सबकुछ बड़ा ही अजीब लगता था . बाल मन में कई अजीब सवाल उठते थे ....उन सवालों के जबाब कोई देने वाला नही था । आज जब कई लोग उनका जबाब दे सकते है तो सवाल ही नही उठते । वो बचपन कहाँ गया ....वो इक्षाशक्ति और जानने की लालशा कहाँ गई ....भाई मै तो बड़ा ही परेशान हूँ । कहतें है अतीत को याद नही करना चाहिए लेकिन मै अपनी बचपन की यादों को कैसे छोड़ दूँ ? वो मस्त जीवन , वो मीठी यादें .....नही भूल सकता । गाँव की गलियों में घूमना । कोई चिंता फिकर नही .... डांट खाना और फ़िर वही करना ,आगा पीछे सोचने की कोई कोशिश नही । घर से ज्यादा दोस्तों की चिंता ....कौन क्या कर रहा है .....इसकी ख़बर रखना । आज कई यादें धुंधली हो गई है ....कुछ तो लुप्त हो गई है ....हाय रे मेमोरी । याद करने की कोशिश बेकार हो जाती । वो बचपन छोटा सफर था लेकिन अकेला सफर तो कतई नही था । आज तो मन भीड़ में भी अकेला लगता है .... ये दर्द बयां नही कर सकता । केवल महशुश कर सकता हूँ ।

6 comments:

श्याम कोरी 'उदय' said...

... बहुत सुन्दर, बचपन की यादें ताजा करा दिये प्रिय मित्र !!!!

sandhyagupta said...

Bachpan chala jata hai bas yaaden rah jati hain.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

dard bayaan karna bhi thik nahi/ dard mahsoos hi hota he/ mahsoos hi karna behtae he/ kyoki dard bayaa vnha ho saktaa he jnhaa dard ko apna samjhne vaale ho//aour vo bhi dard mukt//ynha yaani is dunia me kon he jo dard se bheegaa huaa nahi he///isliye milta bhi vahi he jo logo ke paas hotaa he//kher..
aapne apne bachpan aour vartmaan ki jhalak prastut ki, yaade..kesi bhi ho, mastishk ke kisi naa kisi kone me dabi rahti he aour jab koi usase milta julta prasang aan padtaa he to ekaek vo ubhar kar saamne aa jaati he//

sirf bachpan hi kyu,,,javaani bhi yaad ban kar budaape me hame sataati he///aour budaape me????bas yahi kaam to hotaa he poora jivan yaad karnaa.......///vese ek baat kahu, ham yadi apne dino ko yaad kar rahe hote he to samjh lenaa chahiye ki dhire dhire boode ho rahe he///jo jitnaa yaad karta he utanaa boodaa/////

kher..//

AJEET SINGH said...

wo bachpan hay ...koi lauta de wo din....

श्याम कोरी 'उदय' said...

मार्क जी
कहां चल दिये, कुछ नया पढने नही मिल रहा ... !!!!!

ARVI'nd said...

aapne mujhe bhi apna bachpan yaad dila diya......kash wo din phir laut pata